मप्र / शताब्दी एक्सप्रेस के खाने में कॉकरोच देना पड़ेगा 7 हजार रुपए का हर्जाना

मप्र / शताब्दी एक्सप्रेस के खाने में कॉकरोच देना पड़ेगा 7 हजार रुपए का हर्जाना



शताब्दी एक्सप्रेस में मिले खाने में कॉकरोच और फंफूद मिलने के मामले में उपभोक्ता फोरम ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। फोरम ने रेलवे और उसके फूड कॉन्ट्रेक्टर को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 7 हजार रुपए हर्जाना देने के आदेश दिए हैं।


फोरम में मामले की अध्यक्ष आरके भावे, सदस्य सुनील श्रीवास्तव और क्षमा चौरे ने की। यह मामला वर्ष 2014 का है। पांच साल बाद मिले न्याय के बाद आवेदक का कहना है कि देर से ही सही, लेकिन न्याय मिला। इससे यात्रियों का हौसला बढ़ेगा।


न्यू कबाड़खाना निवासी अब्दुल गनी, साकारा और हिना परवीन ने 2014 में रेल महाप्रबंधक, मुख्य वाणिज्य प्रबंधक व कैटरिंग उत्तर रेल और प्रोपराइटर वृंदावन फूड प्रोडेक्ट के खिलाफ परिवाद दायर किया था। उन्होंने शिकायत में बताया था कि 23 अगस्त 2014 को झांसी से भोपाल के लिए शताब्दी एक्सप्रेस में टिकट बुक किया था। सफर के दौरान यात्रियों को खाना दिया गया। अचानक उन्हें खाने में कॉकरोच दिखाई दिया साथ ही उसमें फंफूद यानी हानिकारक सूक्ष्म जीवाणु मिले। इसके बाद उन्हें उल्टियां शुरू हो गईं।



रेलवे और फूड कॉन्ट्रेक्टर की ओर से पक्ष रखते हुए एडवोकेट राजीव जैन और राहुल चौबे ने कहा कि आवेदकों ने जो आरोप लगाया हैं, वह गलत है। जिस दिन की वे शिकायत कर रहे हैं उस दिन उन्होंने ही नहीं बल्कि 650 यात्रियों ने भोजन किया था। किसी ने भी इस तरह की शिकायत नहीं की, इसलिए परिवादी द्वारा दायर आवेदन को खारिज किया जाए।



दोनों पक्षों को सुनने और प्रस्तुत फोटो, दस्तावेज व साक्ष्यों को देखने के बाद फोरम ने रेलवे की ओर से रखे गए तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। फोरम ने इस संबंध में प्रस्तुत समाचार पत्रों की कटिंग को भी आधार माना। फोरम ने कहा कि रेलवे संयुक्त रूप से या अलग-अलग 5 हजार रुपए हर्जाना और 3 हजार रुपए परिवाद व्यय यानी 7 हजार रुपए एक माह के अंदर आ‌ेदक को दे।