आरजीपीवी-यूआईटी / हिंदी में लिखे उत्तरों का भी किया जाएगा मूल्यांकन, लेकिन न छात्रों को जानकारी दी और न ही किताबें

आरजीपीवी-यूआईटी  / हिंदी में लिखे उत्तरों का भी किया जाएगा मूल्यांकन, लेकिन न छात्रों को जानकारी दी और न ही किताबें



राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) अपने यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (यूआईटी) से इंजीनियरिंग कर रहे छात्र यदि हिंदी में उत्तर लिखते हैं तो उसका भी मूल्यांकन कराया जाएगा। यूआईटी के परीक्षा नियंत्रक हिंडोलिया ने इस बात की पुष्टि की है। 



उन्होंने बताया कि कुलपति ने कहा है कि यदि छात्र हिंदी में उत्तर लिखना चाहता है तो उसे मंजूरी दी जाएगी। इसके लिए विवि ने तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि विवि में पढ़ाने का माध्यम अंग्रेजी ही है। यदि स्टूडेंट चाहेगा तो उसे सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। ऐसे मूल्यांकनकर्ता हैं, जो हिंदी में लिखे गए प्रश्नों के उत्तरों का मूल्यांकन कर सकते हैं। हालांकि, अभी इस संबंध में अधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।



आरजीपीवी पिछले कुछ सालों से हिंदी और अंग्रेजी दो भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराते आ रहा है। ऐसे में अब उत्तर भी हिंदी में खिलने की सुविधा मिलती है तो बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक छात्राें को इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई है। विश्वविद्यालय के पास अभी तक कोई मैकेनिज्म भी तैयार नहीं है। छात्रों को हिंदी भाषा में किताबें भी उपलब्ध नहीं है। इसे वाहवाही लूटने वाला एक नया तरीका हो सकता है।



हिंदी दिवस पर राज्यपाल कर चुके हैं तारीफ
स्थापना दिवस समारोह में पहुंचे राज्यपाल लालजी टंडन को हिंदी भाषा के लिए विवि द्वारा किए जाने वाले कार्यों की जानकारी दी गई थी। इसके चलते उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि द्वारा आयोजित हिंदी दिवस के कार्यक्रम में आरजीपीवी की तारीफ करते हुए कहा था कि मैं राजीव गांधी टेक्निकल यूनिवर्सिटी गया था, मेरा मन प्रसन्न हो गया। यहां टेक्निकल और जितनी भी शिक्षा के लिए जरूरी पुस्तकें हैं उनका हिंदी में अनुवाद हो रहा है। यहां कोर्स बढ़ रहे हैं और हिंदी विवि में बंद हो रहे हैं।



एक भी किताब का शुरू नहीं कराया जा रहा अनुवाद
यूआईटी ने छात्रों काे हिंदी में स्टडी मटेरियल उपलब्ध नहीं कराया है। वहीं आरजीपीवी प्रशासन द्वारा अभी तक किसी भी किताब का हिंदी में अपने स्तर पर अनुवाद भी नहीं कराया गया है। न ही कोई विशेष कमेटी या टीम गठित की गई है, जो इंजीनियरिंग कोर्स की किताबों को हिंदी में उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही हों।